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Joke

WHERE'S THE BODY? Veronica was practicing the piano when suddenly there was a loud pounding on the front door. She opened it and found a breathless cop. "What's the matter?!" she asked. "Where's the body?!" demanded the officer. "What are you talking about?" "We just got a tip that some guy named Mozart was being butchered to pieces in this house."

"एक बैंकर की कलम से"

पूरे दिनभर शाखा का कार्य निबटा कर शाम को 45 किलोमीटर दूर अपने वाहन से मीटिंग के लिए निकले! मीटिंग शुरू हुई और खत्म होने का नाम ही नही ले रही थी,खाना भी आ चुका था और ठंडा पड़ना शुरू हो चुका था,वो मन्चूरियन की खुशबू बड़ा लालायित कर रही थी लेकिन साथ ही वापस 45 किलोमीटर दूर कार चलाकर ले जाने का खौफ भी अपना असर दिखा रहा था! अंततः जब शरीर से प्राण छूटने को ही थे तभी मीटिंग का समापन हुआ और हमने उस ठंडे पड़ चुके भोजन को पूरी इज़्ज़त देते हुए ग्रहण किया और निकल पड़े उस सुनसान पड़ चुके अंधेरे रास्ते में जिस पर 80 से 100 की स्पीड में कार बस ऐसे चला रहे थे मानो हमने हमारा टर्म प्लान आज ही के दिन के लिए करवाया था! कार जब चल रही थी तो हमने हमारी आंखों को ऐसे मुश्किल से फाड़ रखा था की बस कुछ समय और खुली रहो फिर तुम्हे वो स्लीपवेल का गद्दा नसीब होने वाला है और बस उस स्लीपवेल के गद्दे की आस में हमारी आंखों ने हमारा साथ दिया और साथ तो उस नीलगाय ने भी दिया जो बेचारी हमारी कार की गति से थोड़ा ज्यादा तेज़ निकल गयी अन्यथा हम या वो या हमारी कार किसी को तो अहसास हो ही जाता की "speed  thrills but kills". रास्त...

लंकाधीश रावण कि मांग

(अद्भुत प्रसंग, भावविभोर करने वाला प्रसंग जरुर पढ़े) बाल्मीकि रामायण और तुलसीकृत रामायण में इस कथा का वर्णन नहीं है, पर तमिल भाषा में लिखी *महर्षि कम्बन की #इरामावतारम्'# मे यह कथा है। रावण केवल शिवभक्त, विद्वान एवं वीर ही नहीं, अति-मानववादी भी था..। उसे भविष्य का पता था..। वह जानता था कि श्रीराम से जीत पाना उसके लिए असंभव है..। जब श्री राम ने खर-दूषण का सहज ही बध कर दिया तब तुलसी कृत मानस में भी रावण के मन भाव लिखे हैं--          खर दूसन मो   सम   बलवंता ।          तिनहि को मरहि बिनु भगवंता।। रावण के पास जामवंत जी को #आचार्यत्व का निमंत्रण देने के लिए लंका भेजा गया..। जामवन्त जी दीर्घाकार थे, वे आकार में कुम्भकर्ण से तनिक ही छोटे थे। लंका में प्रहरी भी हाथ जोड़कर मार्ग दिखा रहे थे। इस प्रकार जामवन्त को किसी से कुछ पूछना नहीं पड़ा। स्वयं रावण को उन्हें राजद्वार पर अभिवादन का उपक्रम करते देख जामवन्त ने मुस्कराते हुए कहा कि मैं अभिनंदन का पात्र नहीं हूँ। मैं वनवासी राम का दूत बनकर आया हूँ। उन्होंने तुम्हें सादर प्रणाम कहा है। रावण ने सविनय कहा–   "आप हमारे पितामह के भाई हैं। इस न...

PEARLS OF WISDOM ...............For.............. S E N I O R C I T I Z E N S

When you get old... ▪Never teach anyone anything, unless requested... even if you are right. ▪Do not try to help unless asked for... but be ready & available for it. ▪️Do not give unsolicited opinion in academic, professional or financial matters... detach yourself. ▪️Do not expect everyone to follow your advise or opinion ... or even respect your experience. ▪Don't worry about future of your children beyond a limit... let them perform or perish. ▪Don't try to protect your loved ones from all the misfortunes of the World... Just pray for them. ▪Don't complain about your health, your neighbours, your retirement, your woes all the time... no one is interested. ▪Don't expect gratitude from children... specially when they think too wise of themselves. ▪ Don't exhaust your emotions on people who do not respect you... move away. ▪ If you are not wanted or loved, find it elsewhere... enough deserving people beyond your family. ▪Do not brood over lost opportunities and ...

Saraswati Bandana in Veda

*म॒हो अर्णः॒ सर॑स्वती॒ प्र चे॑तयति के॒तुना॑। धियो॒ विश्वा॒ वि रा॑जति॥* ऋग्वेद :१/३/१२ जो (सरस्वती) वाणी (केतुना) शुभ कर्म अथवा श्रेष्ठ बुद्धि से (महः) अगाध (अर्णः) शब्दरूपी समुद्र को (प्रचेतयति) जाननेवाली है, वही मनुष्यों की (विश्वाः) सब बुद्धियों को विशेष प्रकाशित करती है। आज सृष्टि के आरम्भ दिवस *बसंत पंचमी* पर हम सभी की वाणी एवं बुद्धि में *देवी सरस्वती* विराजित हों, ऐसी शुभकामनाएँ। 💐🍁🦚🌹🌻🙏🏻

गीताप्रेस गोरखपुर का इतिहास क्या है?

जिसने घर-घर तक गीता पहुँचाया, धर्म की सेवा 'घाटे का सौदा'नहीं है ये सीख दी। गीता प्रेस के संस्थापक श्री हनुमान प्रसाद जी पोद्दार को नमन। बंगाली बड़ी तेज़ी से हिन्दू से ईसाई बनते जा रहे थे। कारण था - कलकत्ता मे मदर टेरेसा की ईसाई मिशनरी। यहाँ बाइबिल के अलावा ईसाईयों की अन्य किताबें (जिनमें हिन्दू धार्मिक परम्पराओं के अनादर से लेकर झूठ तक भरा होता था,) सहज उपलब्ध थीं। तभी युवा हनुमान प्रसाद पोद्दार ने... गीता प्रेस गोरखपुर आज किसी परिचय की मोहताज नहीं है- धर्मशास्त्रों के मुद्रण (छपाई) और वितरण में अग्रणी इस प्रकाशक की माली हालत भले ऊपर-नीचे चलती रहती हो, जो किसी भी व्यवसायिक संस्थान के साथ होता ही रहता है, लेकिन हिन्दू समाज में इसके जितना सम्मान शायद ही किसी संस्थान का है किसी और का नहीं। और गीता प्रेस को इस मुकाम तक पहुँचाने में जिनका योगदान सबसे अधिक रहा, उनमें से एक हैं हनुमान प्रसाद पोद्दार- गीताप्रेस की मासिक पत्रिका 'कल्याण' के संस्थापक सम्पादक, और इसे अखिल-भारतीय विस्तार देने वाले स्वप्नदृष्टा, जिन्होंने यह मिथक तोड़ा कि धर्म के प्रचार-प्रसार के काम में आर्थिक हान...

Krishna chronology

*EXCELLENT INFO ABOUT SRI KRISHNA* _*1)* Krishna was born 5252 years  ago._  _*2)* Date of Birth: 18th July, 3228 B.C._ _*3)* Month: Shravan._ _*4)* Day:  Ashtami._ _*5)* Nakshatra: Rohini._ _*6)* Day: Wednesday._ _*7)* Time: 00:00 A.M._ _*8)* Shri Krishna lived 125 years, 08 months & 07 days._ _*9)* Date of Death: 18th February 3102BC._ _*10)* When Krishna was 89 years old; the mega war (Kurukshetra) war took place._   _*11)* He died 36 years after the Kurukshetra war._ _*12)* Kurukshetra War was *started on Mrigashira Shukla Ekadashi, BC 3139. i.e "8th December 3139BC" and ended on "25th December, 3139BC"._    _*13)* There was a Solar eclipse between "3p.m to 5p.m on 21st December, 3139BC" ; cause of Jayadrath's death._ _*14)* Bhishma died on 2nd February,(First Ekadasi of the Uttarayana), in 3138 B.C._ _*15)* Krishna  is worshipped as:_ _*(a)* Krishna Kanhaiyya: Mathura._ _*(b)* Jagannath: In Odisha._ _*(c)* Vithoba: In *Maharashtra._ _*(d)* Sri...